रायपुर। राजधानी में जूनियर डॉक्टर्स की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल फिलहाल टल गई है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने अपनी हड़ताल को 7 दिन के लिए आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया।
एक विज्ञप्ति के माध्यम से भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु बैठक के दौरान ही संबंधित अधिकारियों को फोन पर आवश्यक निर्देश जारी किए और समाधान की रूपरेखा तैयार की। हड़ताल से पहले जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की और अपनी मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की। डॉक्टरों ने अपनी समस्याओं और लंबित मांगों को मंत्री के सामने रखा। स्वास्थ्य मंत्री ने जूनियर डॉक्टरों की मांगों के समाधान के लिए 7 दिन का समय मांगा। उन्होंने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों के निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों की हड़ताल टलने से अस्पतालों में इलाज व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका कम हो गई है। हड़ताल टलने के बाद मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने सरकार को अपनी मांगों के समाधान के लिए समय दिया है। यदि तय समय में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा। फिलहाल रायपुर में जूनियर डॉक्टर काम पर बने रहेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई बैठक का मुख्य सार:
1. IMA की प्रमुख मांगें हॉस्पिटल एक्ट से छूट: 50 बिस्तरों (beds) से कम क्षमता वाले छोटे अस्पतालों को हॉस्पिटल एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि प्रशासनिक और नियामकीय बोझ कम हो सके।
बायोमेडिकल वेस्ट शुल्क: वेस्ट डिस्पोजल के अत्यधिक शुल्क की प्रतिवर्ष होने वाली ~10% की वृद्धि पर रोक लगाई जाए तथा वर्तमान दर को अगले 3 वर्षों तक यथावत रखा जाए।
भविष्य में शुल्क वृद्धि से पहले IMA प्रतिनिधियों के साथ सहमति ली जाए।
4–5 माह पूर्व हुई बैठक के निर्णयों को शीघ्र सार्वजनिक किया जाए।
नगर निगम शुल्क की समीक्षा: नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए उपयोगकर्ता शुल्क (User Charges) और अनुज्ञप्ति शुल्क (License Fees) की समीक्षा कर राहत दी जाए।
फायर सेफ्टी ऑडिट: थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा वसूले जा रहे मनमाने शुल्क पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित शुल्क सीमा निर्धारित की जाए।
सिंगल विंडो सिस्टम (Single Window System): अस्पतालों के लिए आवश्यक सभी NOC एवं अनुमतियों/क्लीयरेंस हेतु एकीकृत ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू किया जाए।







